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| Album Apna Roop Dikhao Guru Ji |
| Audio of Shabad "Hum Bhikhak Bhikhari Tere" |
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| Lyrics of Shabad "Hum Bhikhak Bhikhari Tere" |
| रागु धनासिरी महला ३ घरु ४ (बानी गुरु अमर दास जी) हम भीखक भेखारी तेरे तू निज पति है दाता ॥
होहु दैआल नामु देहु मंगत जन कंउ सदा रहउ रंगि राता ॥१॥
हंउ बलिहारै जाउ साचे तेरे नाम विटहु ॥
करण कारण सभना का एको अवरु न दूजा कोई ॥१॥ रहाउ ॥
बहुते फेर पए किरपन कउ अब किछु किरपा कीजै ॥
होहु दइआल दरसनु देहु अपुना ऐसी बखस करीजै ॥२॥
भनति नानक भरम पट खूल्हे गुर परसादी जानिआ ॥
साची लिव लागी है भीतरि सतिगुर सिउ मनु मानिआ ॥३॥ |
| Raag Dhanasri Mehlaa 3 Ghar 4 (Bani Guru Amar Das Ji) Ham Bhikhak Bhekhari Tere Tu Nij Pat Hai Data.
Hohu Daiyal Naam Deh Mangat Jan Kaun Sada Rahau Rang Rata. ||1||
Haun Baliharey Jau Sachey Tere Naam Vitahu.
Karan Kaaran Sabhna Ka Eko Avar Na Duja Koi. ||1|| Rahaau.
Bahutey Fer Pay Kirpan Kau Ab Kichh Kirpa Kijey.
Hohu Daiyal Darsan Deh Apuna Esi Bakhas Karijey. ||2||
Bhanat Nanak Bharam Pat Khulhey Gur Parsadi Janiaa.
Sachi Liv Lagi Hai Bhitar Satgur Siu Man Maaniaa. ||3|| |
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| Charan Singh Ji Maharaj - English Translated |
| Audio of Satsang "O Friend, Observe the Law of This Age" |

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| Lyrics of Shabad "Is Jug Ka Dharam Parroh Tum Bhaai" |
राग गउड़ी गुआरेरी महला ३ असटपदीआ (बानी गुरु अमरदास जी)
इसु जुग का धरमु पड़हु तुम भाई ॥ पूरै गुरि सभ सोझी पाई ॥
ऐथै अगै हरि नामु सखाई ॥१॥
राम पड़हु मनि करहु बीचारु ॥ गुर परसादी मैलु उतारु ॥१॥ रहाउ ॥
वादि विरोधि न पाइआ जाइ ॥ मनु तनु फीका दूजै भाइ ॥
गुर कै सबदि सचि लिव लाइ ॥२॥
हउमै मैला इहु संसारा ॥ नित तीरथि नावै न जाइ अहंकारा ॥
बिनु गुर भेटे जमु करे खुआरा ॥३॥
सो जनु साचा जि हउमै मारै ॥ गुर कै सबदि पंच संघारै ॥
आपि तरै सगले कुल तारै ॥४॥
माइआ मोहि नटि बाजी पाई ॥ मनमुख अंध रहे लपटाई ॥
गुरमुखि अलिपत रहे लिव लाई ॥५॥
बहुते भेख करै भेखधारी ॥ अंतरि तिसना फिरै अहंकारी ॥
आपु न चीनै बाजी हारी ॥६॥
कापड़ पहिरि करे चतुराई ॥ माइआ मोहि अति भरमि भुलाई ॥
बिनु गुर सेवे बहुतु दुखु पाई ॥७॥
नामि रते सदा बैरागी ॥ ग्रिही अंतरि साचि लिव लागी ॥
नानक सतिगुरु सेवहि से वडभागी ॥८॥
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Raag Gaudi, Guaareri, Mahla 3rd Astpadeeya Bani Guru Amar Das Ji
Is jug ka dharam parroh tum bhaai, Poorai gur sabh sojhi paai.
Aithai agai har naam sakhaai.
Raam parroh man karoh beechaar, Gur parsaadi mail utaar. "Rahaao"
Vaad virodh na paaya jaaye, Man tan pheeka doojai bhaaye.
Gur kai sabad sach liv laaye.
Haumai maila ih sansaara, Nit teerath naavai na jaaye ahankaara.
Bin gur bhete jam kare khuaara.
So jan saacha je haumai maarai, Gur kai sabad panch sanghaarai.
Aap tarai sagale kul taarai.
Maaya moh nat baaji paai, manmukh andh rahe laptaai.
Gurmukh alipat rahe liv laai.
Bahute bhekh karai bhekh-dhaari, Antar tisna phirai ahankaari.
Aap na cheenai baaji haari.
Kaapad pahir kare chaturaai, Maaya moh at bharam bhulaai.
Bin gur seve bahut dukh paai.
Naam rate sada bairaagi, Grihi antar saach liv laagi.
Naank satgur sevah se vadbhaagi.
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| Charan Singh Ji Maharaj - English Translated |
| Audio of Satsang "He Is The True Creator, The Only Giver" |

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| Lyrics of Shabad "JagJeevan Saachaa Eko Daataa" |
रागु मारू महला ३ ॥
जगजीवनु साचा एको दाता ॥ गुर सेवा ते सबदि पछाता ॥
एको अमरु एका पतिसाही जुगु जुगु सिरि कार बणाई हे ॥१॥
सो जनु निरमलु जिनि आपु पछाता ॥ आपे आइ मिलिआ सुखदाता ॥
रसना सबदि रती गुण गावै दरि साचै पति पाई हे ॥२॥
गुरमुखि नामि मिलै वडिआई ॥ मनमुखि निंदकि पति गवाई ॥
नामि रते परम हंस बैरागी निज घरि ताड़ी लाई हे ॥३॥
सबदि मरै सोई जनु पूरा ॥ सतिगुरु आखि सुणाए सूरा ॥
काइआ अंदरि अम्रित सरु साचा मनु पीवै भाइ सुभाई हे ॥४॥
पड़ि पंडितु अवरा समझाए ॥ घर जलते की खबरि न पाए ॥
बिनु सतिगुर सेवे नामु न पाईऐ पड़ि थाके सांति न आई हे ॥५॥
इकि भसम लगाइ फिरहि भेखधारी ॥ बिनु सबदै हउमै किनि मारी ॥
अनदिनु जलत रहहि दिनु राती भरमि भेखि भरमाई हे ॥६॥
इकि ग्रिह कुट्मब महि सदा उदासी ॥ सबदि मुए हरि नामि निवासी ॥
अनदिनु सदा रहहि रंगि राते भै भाइ भगति चितु लाई हे ॥७॥
मनमुखु निंदा करि करि विगुता ॥ अंतरि लोभु भउकै जिसु कुता ॥
जमकालु तिसु कदे न छोडै अंति गइआ पछुताई हे ॥८॥
सचै सबदि सची पति होई ॥ बिनु नावै मुकति न पावै कोई ॥
बिनु सतिगुर को नाउ न पाए प्रभि ऐसी बणत बणाई हे ॥९॥
इकि सिध साधिक बहुतु वीचारी ॥ इकि अहिनिसि नामि रते निरंकारी ॥
जिस नो आपि मिलाए सो बूझै भगति भाइ भउ जाई हे ॥१०॥
इसनानु दानु करहि नही बूझहि ॥ इकि मनूआ मारि मनै सिउ लूझहि ॥
साचै सबदि रते इक रंगी साचै सबदि मिलाई हे ॥११॥
आपे सिरजे दे वडिआई ॥ आपे भाणै देइ मिलाई ॥
आपे नदरि करे मनि वसिआ मेरै प्रभि इउ फुरमाई हे ॥१२॥
सतिगुरु सेवहि से जन साचे ॥ मनमुख सेवि न जाणनि काचे ॥
आपे करता करि करि वेखै जिउ भावै तिउ लाई हे ॥१३॥
जुगि जुगि साचा एको दाता ॥ पूरै भागि गुर सबदु पछाता ॥
सबदि मिले से विछुड़े नाही नदरी सहजि मिलाई हे ॥१४॥
हउमै माइआ मैलु कमाइआ ॥ मरि मरि जमहि दूजा भाइआ ॥
बिनु सतिगुर सेवे मुकति न होई मनि देखहु लिव लाई हे ॥१५॥
जो तिसु भावै सोई करसी ॥ आपहु होआ ना किछु होसी ॥
नानक नामु मिलै वडिआई दरि साचै पति पाई हे ॥१६॥
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